RKG Code
← Back to Blog
World's First Calculator? | Episode 1 | Abacus to AI Series | RKG Code

World's First Calculator? | Episode 1 | Abacus to AI Series | RKG Code

rkgcode August 4, 2026 5 min read

World's First Calculator?

देखिए पूरा वीडियो यहाँ:

सोचो ज़रा,

अगर आपके पास ना mobile होता, ना laptop और ना ही कोई calculator और आपको बड़े-बड़े numbers का calculations करना होता जैसे कि 7869 X 992, तो आप कैसे करते?

क्या आप कर पाते?

लेकिन ऐसा किया इंसानों ने, आज से 5000 साल पहले,

Mesopotamian Life

उन्होंने एक ऐसी machine बनाई जो बिना battery, बिना screen और बिना किसी coding के काम करती थी।

Right, मैं बात कर रहा हूँ – अबैकस की।

Abacus

तो, आज की कहानी है – इंसानों द्वारा बनाई गई पहली गिनती करने वाली machine की।

ये सिर्फ़ इतिहास नहीं है, ये एक शुरुआत थी Computer Revolution की!

Welcome to “From Abacus to AI” –

एक ऐसी series, जो आपको ले जाएगी computer के जन्म से लेकर Artificial Intelligence तक की एक अद्भुत यात्रा पर।

और ये है – Episode 1: The Dawn of Calculation.

आज से हज़ारों साल पहले, जब ना भाषा थी, ना ही numbers,

तब इंसानों को एक बड़ी ज़रूरत महसूस हुई – गिनती करने की।

कितने जानवर शिकार किए? कितना अनाज इकट्ठा हुआ? और कितने औज़ार बनाए?

और तब उन्होंने बनाया – Tally Marks

Tally Marks

कई गुफ़ाओं में आज भी ऐसे पत्थर मिले हैं जिनमें |||| निशान बने हुए हैं।

इन्हें कहते हैं Tally Marks या मिलान चिन्ह

 Wolf Bone Tally Marks

लेकिन इसमें एक समस्या है – ये तभी तक काम कर सकते हैं जब तक चीज़ें कम हों।

मान लो किसी के पास 83 भेड़ हों तब?

क्या हर भेड़ के लिए एक लाइन ड्रॉ करेंगे?

फिर इंसानों ने एक नया तरीक़ा ढूँढा – गिनती के लिए चीज़ें इकट्ठा करना।

जैसे कंकड़, बीज और हड्डियाँ – हर चीज़ बन गई एक गिनती का माध्यम।

इन्हें कहा गया – Counting Tokens

लेकिन कब तक इस तरह से गिनती करने के लिए इंसान चीज़ों को इकट्ठा करता?

उन्हें ज़रूरत थी किसी बेहतर तरीक़े की।

और फिर आया वो moment…

जिसने इतिहास बदल दिया।

जब इंसानों ने लकड़ी के फ्रेम और मोतियों से बना लिया – दुनिया का पहला computer: अबैकस

AI Generated - Abacus

अबैकस का जन्म माना जाता है करीब 2300–2700 BC में, मेसोपोटामिया में।

वो जगह आज के समय में इराक है।

लकड़ी का एक फ्रेम, जिसमें rod और उस पर चलने वाले मोती।

हर मोती की अपनी जगह और अपनी एक value।

और यही था – Base 10 Number System का शुरुआती प्रयोग।

अब यहाँ एक सवाल ज़रूर आएगा:

"जब उस समय कोई लिखित संख्याएँ नहीं थीं, तो Base 10 system का मतलब क्या?"

तो समझिए – Number System कोई लिखने का तरीक़ा नहीं,

बल्कि सोचने का एक logic होता है।

और Base 10 का मतलब होता है – हर 10 unit के बाद एक नया digit, एक नया place value।

ये system बना – इंसान के शारीरिक structure के अनुसार:

10 उंगलियाँ, 10 पैर की उंगलियाँ – इसी से Base 10 का concept develop हुआ।

Human's 10 Fingure

लेकिन एक चीज़ missing थी – Zero!

उस समय तक, दुनिया की किसी भी civilization के पास zero का symbol या concept नहीं था।

और बिना zero के, बड़े numbers का calculation incomplete था…

5वीं शताब्दी में आर्यभट ने zero का concept समझाया,

Indian Mathematician - Aryabhatt

और 7वीं शताब्दी में ब्रह्मगुप्त ने इसे mathematically define किया।

Indian Mathematician - Brahmagupta

जब Zero का concept develop हो चुका था, तब अबैकस और भी powerful बन गया।

अब न केवल calculations possible थे,

बल्कि उन्हें logically structure भी किया जा सकता था।

इसी वजह से दुनिया के अलग-अलग cultures ने अबैकस को अपने तरीक़े से evolve किया —

हर जगह की सोच, design और requirement के हिसाब से।

फिर चीन ने इसे और आगे बढ़ाया – Chinese Suanpan नाम से।

Chinese Suanpan

इसमें दो section थे – ऊपर 2 मोती और नीचे 5 मोती।

और इसी के combination से बनते थे complex numbers!

इधर रोम में आया – Roman Abacus,

Roman Abacus

और जापान में बना – Soroban,

Japnese Sorobon

जिसमें सिर्फ़ 1 upper bead और 4 lower beads होते थे।

इसे इतनी efficiency से use किया जाता था कि जापानी लोग आज भी इसे calculation के लिए बच्चों को train करते हैं!

अब आप सोच रहे होंगे कि ये अबैकस काम कैसे करता है?

हर row represent करती है – units, tens, hundreds…

मोती ऊपर-नीचे करके add, subtract, multiply, और divide तक किया जा सकता है!

और अधिक जानकारी के लिए आपको YouTube पर कई सारे playlist मिल जाएंगे…

आज भी दुनिया के कई देशों में अबैकस का use किया जाता है –

ख़ासकर बच्चों को Mental Math सिखाने के लिए।

क्योंकि इससे दिमाग़ का logic और memory sharp होती है।

अब आप सोच रहे होंगे – जब हमारे पास AI और Supercomputers हैं, तो हम अबैकस की कहानी क्यों सुन रहे हैं?

क्योंकि यह सिर्फ़ एक गिनती की मशीन नहीं थी,

यह था – Logic-Based Calculation का पहला क़दम।

इसीने इंसानों को सिखाया – Compute कैसे करना है।

इसीलिए Computer शब्द भी आया – ‘to compute’ से!

हर नई खोज की शुरुआत छोटी होती है –

एक लकड़ी का फ्रेम, कुछ मोती – और आज हम AI से बात कर रहे हैं!

तो दोस्तों, ये थी अबैकस की कहानी –

एक ऐसी मशीन जिसने इंसान को numbers के साथ सोचने की कला सिखाई।

ये सिर्फ़ इतिहास नहीं है, ये हमारी computing की जड़ें हैं।

Next Episode में हम जानेंगे –

कैसे कुछ महान mathematicians ने बनाए ऐसे सिद्धांत,

जिन्होंने आज के algorithms की नींव रखी।

और जानेंगे – कौन थे अल-ख़्वारिज़्मी,

Al-Khwarizmi

जिन्होंने ‘Algorithm’ शब्द दिया।

अगर आपको ये ब्लॉग पसंद आया हो,

Comment में बताइए – क्या आपने कभी अबैकस से calculation किया है?

और Subscribe कीजिए – हमारे अगले Episode के लिए!

देखिए पूरा वीडियो यहाँ:

Next Episode: 

Who invented zero first? | Episode 2 | Abacus to AI Series | RKG Code

credits:

Powered by Synscribe